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चित्रकूट के इस मंदिर में आज भी है तुलसीदास का चंदन घिसने वाला पत्थर, भगवान राम से है ये खास कनेक्शन

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विकाश कुमार/चित्रकूट: धर्म नगरी चित्रकूट प्रभु श्री राम की तपोस्थली के साथ-साथ गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली भी रही है. धर्मनगरी चित्रकूट वह स्थान है जहां गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्री राम के दर्शन हुए थे और भगवान राम को गोस्वामी तुलसीदास ने रामघाट के तट पर चंदन लगाया था. आज भी चित्रकूट के एक मंदिर में वह पत्थर मौजूद है जिस पर तुलसीदास चंदन घिसते थे. उस पत्थर के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त मंदिर में पहुंचते हैं. मंदिर के पुजारी का दावा है कि यह वही पत्थर है जिसमें तुलसीदास जी चंदन घिसा करते थे.

तुलसीदास ने श्री राम का किया था चंदन से तिलक
हम बात कर रहे है चित्रकूट के रामघाट तट पर बने तोता मुखी हनुमान मंदिर की. यहां आज भी गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा के साथ-साथ उनका चंदन घिसने वाला पत्थर मौजूद है. लोगों के लिए यह पत्थर दर्शनीय है. इसके दर्शन के लिए लोग इस मंदिर में पहुंचते हैं और तुलसीदास के दर्शन के साथ उस पत्थर के दर्शन कर चंदन का तिलक करवाते हैं. मान्यता है कि आज भी सुबह तुलसीदास जी को स्नान करने के बाद जो चंदन लगाया जाता है वह इसी प्राचीन पत्थर पर घिसकर लगाया जाता है.

पुजारी ने दी जानकारी
मंदिर के पुजारी मोहित दास ने बताया कि यह बहुत ही प्राचीन पत्थर है जिसमें गोस्वामी तुलसीदास जी चंदन घिसा करते थे. आज भी इस मंदिर में वह परंपरा चली आ रही है कि सबसे पहले सुबह गोस्वामी तुलसीदास जी को स्नान कराने के बाद इस प्राचीन पत्थर पर चंदन घिसकर उनको तिलक किया जाता है. इसके बाद वही चंदन आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में लगाया जाता है.

उन्होंने आगे की जानकारी देते हुए बताया कि जैसे अलग-अलग तीर्थ में प्रसाद का अपना अलग-अलग महत्व वैसे ही चित्रकूट में चंदन के प्रसाद का एक अलग महत्व है. आज भी भक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं और चंदन का प्रसाद ग्रहण करना नहीं भूलते हैं.

FIRST PUBLISHED : July 7, 2024, 19:31 IST

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