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मां विंध्यवासिनी के द्वारपाल हैं भैरो व हनुमान,इनकी अनुमति के बिना एंट्री नहीं

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मुकेश पांडेय/मिर्जापुर. अगर आप मां विंध्यवासिनी धाम में दर्शन के लिए आ रहे हैं तो मां के दो सशक्त द्वारपालों की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं कर सकते. आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी देवी के द्वारपाल भैरो व हनुमान की अनुमति के बिना विंध्य क्षेत्र में किसी को प्रवेश नहीं मिल सकता. मां की चमत्कारिक शक्ति का आशीर्वाद भी इनके बिना अधूरा है. मां विंध्यवासिनी धाम में जिस दिशा से आएंगे उसके लिए पहले भैरो से अनुमति लेनी पड़ेगी. भय को हरने वाले भैरो के दर्शन के बाद ही मां की आराधना पूरी होती है. इसी तरह भक्त हनुमान से भी श्रद्धालुओं को अनुमति लेनी होती है.

धर्मगुरु त्रियोगी नारायण मिश्रा ने बताया कि मां विंध्यवासिनी धाम में किसी भी कोण से प्रवेश करेंगे, तो आपको भैरो के दर्शन जरूर होंगे. पूरब दिशा से आते हैं तो आनंद भैरो, पश्चिम से सिद्धनाथ भैरो, उत्तर से रुरु भैरो और दक्षिण में कपाल भैरो की अनुमति के बिना धाम में प्रवेश नहीं कर सकते हैं. मां विंध्यवासिनी के धाम में कुल 52 भैरो हैं. जो समस्त भक्तों पर कृपा बरसाते हुए उन्हें भयमुक्त करते हैं. भैरो के दर्शन के बिना मां की आराधना पूर्ण नहीं होती है.

दक्षिणमुखी हनुमान हैं सशक्त द्वारपाल
मां विंध्यवासिनी के गर्भगृह के बाहर दक्षिणमुखी हनुमान विराजे हैं, जो आपको समस्त शत्रुओं पर विजय दिलाते हैं और दुख का समन करते हैं. अगर आप भगवान हनुमान के नेत्र को देखेंगे तो वह मां विंध्यवासिनी की ओर देखते प्रतीत होते हैं. मां विंध्यवसिनी धाम में जितने हनुमान के विग्रह मिलेंगे, वह मां की ओर ही देखते मिलेंगे. संकटमोचन हनुमान मां विंध्यवासिनी धाम में विशेष हो जाते हैं. इसलिए हनुमान और भैरो के दर्शन से मां के दर्शन पूर्ण होते हैं. मां विंध्यवासिनी ने हनुमान को अमरत्व का आशीर्वाद दिया है.

Tags: Dharma Aastha, Local18, Maa Vindhyavasini Temple, Mirzapur information

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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