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बदमाशों ने काट दिए थे हाथ…नकली हाथों से किया ऐसा काम, आज हर ओर हो रहा नाम

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बरेली. काम करो ऐसा एक पहचान बन जाए, हर चाल ऐसी चलो कि निशान बन जाए, जिंदगी तो हर कोई काट लेता है,जिंदगी जियो इस कदर की मिसाल बन जाए. इन चंद लाइनों को पढ़ना तो बहुत आसान है लेकिन अपने जीवन में उतारना उतना ही मुश्किल है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं बरेली के एक ऐसे शिक्षक के बारे में, जिन्होंने इन लाइनों को अपने जीवन में इस कदर उतारा कि वह अब लोगों के लिए एक मिसाल बनकर खड़े हुए हैं. हम बात कर रहे हैं बरेली के भोजीपुरा के बंजरिया जागीर गांव के रहने वाले सैयद असद अली की, जिनकी एक झड़प के दौरान बदमाशों ने हाथ काट दिए थे. उन्होंने हार नहीं मानी और आर्टिफिशियल हाथ लगाकर बच्चों को पढ़ाया. तकरीबन 35 साल की जॉब के बाद वह सेवानिवृत्त हो गए. अब भी वह बच्चों को अपने घर पर पढ़ाते हैं. साथ ही साथ ऑनलाइन शिक्षा भी गरीब बच्चों को फ्री में देने के लिए अपनी वीडियो के माध्यम से अपने ज्ञान को साझा करने के लिए सोशल मीडिया पर दिन-रात काम करते हैं.

सैयद असद अली बताते हैं कि उन्हें इकबाल साहब के एक शेर, ‘ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है’, से बहुत प्रेरणा मिली. फिर जब मैं अपने हाथ लगवाने के लिए लखनऊ के अस्पताल में गया, तो वहां पर मैंने देखा कि एक व्यक्ति जिसके दोनों हाथ व एक पैर नहीं है, वह उन सभी हैंडीकैप्ड लोगों का हेड है. उस व्यक्ति को देखकर मुझे अपने जीवन में बहुत कुछ करने की प्रेरणा मिली और उसके बाद से ही मैंने बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया. मैंने एमए संस्कृत और उर्दू के सब्जेक्ट की कई परीक्षाएं भी दीं और इन सभी परीक्षाओं मैं प्रथम श्रेणी से पास हुआ. बच्चों को पढ़ाने के लिए आज भी मैं फ्री में गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए सोशल मीडिया पर अक्सर अपनी वीडियो बनाकर अपलोड करता हूं और घर-घर जाकर भी गरीब तबके के बच्चों को फ्री में पढ़ाना पसंद करता हूं.

डॉक्टर और अन्य लोगों ने की मदद

सैयद असद अली बताते हैं कि आर्टिफिशियल हाथ लगवाने के बाद उन्हें शुरुआत में काफी परेशानियां हुईं लेकिन उस समय वहां के डॉक्टर और अन्य लोगों ने उनकी काफी मदद की. उनका हौसला बढ़ाया. उसके बाद वह शासन में गए. वहां पर वह काफी सम्भ्रांत लोगों से मिले, वहां कई मंत्री भी थे, जिनके सहयोग से मुझे टीचर की नौकरी मिली. तब उन्होंने सोचा कि अब मुझे यह नौकरी मिल गई है, तो मुझे इस नौकरी का भी पालन करना चाहिए और मैंने धीरे-धीरे कई कठिन प्रयासों से अपने इन हैंडीकैप्ड हाथों से लिखने की कोशिश की और बच्चों को लिखकर बोलकर हर तरह से पढ़ाया. मैं अपने इन हाथों से ब्लैक बोर्ड पर अच्छे से लिख भी लेता हूं और बच्चों को अच्छे से समझा भी देता हूं.

Tags: Bareilly information, Local18, UP information

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