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चुनाव हारने की ये कैसी जिद… अब 100वीं बार किया नामांकन, वजह जान पकड़ लेंगे माथा

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हरिकांत शर्मा/आगरा: भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि आप संविधान के दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए देश का कोई भी चुनाव लड़ सकते हैं. देश का संविधान इसकी इजाजत देता है. भारत में लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी चल रही है. पार्टी के प्रत्याशी नामांकन पत्र खरीदने व दाखिल करने में लगे हुए हैं. ऐसे में हम आपको आगरा के एक ऐसे उम्मीदवार से मिलवाने जा रहे हैं, जिसे ग्राम प्रधान, वार्ड मेंबर से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ा है. अब तक अपनी उम्र से ज्यादा चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड बना लिया है.

आगरा खेरागढ़ तहसील के ग्राम पंचायत नगला दूल्हे खां निवासी अंबेडकरी हसनुराम अंबेडकरी, जो आगरा लोकसभा और फतेहपुर सीकरी लोकसभा के लिए नामांकन करने जा रहे हैं. इसी के साथ उनका 100 बार चुनाव लड़ने का आंकड़ा भी पूरा होने जा रहा है.

खेती-किसानी और राजमिस्त्री का करते हैं काम
खेती और राजमिस्त्री का काम करने वाले चौथी कक्षा पास 77 साल के हसनू राम के चुनाव लड़ने और हारने के पीछे एक दिलचस्प किस्सा जुड़ा हुआ है . सन् 1984 में पहली बार आगरा के खेरागढ़ से निर्दलीय चुनाव लड़ा और हार का सामना करना पड़ा. इसमें उन्हें 16,800 मत प्राप्त हुए थे. तब से हसनू का हार का सिलसिला शुरू हुआ, जो अब तक जारी है. इस बार उन्होंने आगरा की दो लोकसभा आगरा और फतेहपुर सीकरी से नामांकन दाखिल करने के लिए जिला मुख्यालय से पर्चा खरीदा है. इसी के साथ उनका चुनाव लड़ने का आंकड़ा भी पूरा होने जा रहा है.

‘तुझे तो तेरी खुद की बीवी तक वोट नहीं देगी’
‘तुझे तो तेरी खुद की बीवी तक वोट नहीं देगी…’ ये है वो बात जो हसनुराम को चुभ गई थी. इस वजह से उन्होंने ग्राम प्रधान से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ा. दरअसल, सन् 1974 से वामसेफ के जिला संयोजक थे. लेकिन, जब उन्होंने सन् 1985 में आगरा के बीएसपी कन्वीनर   से विधानसभा के चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगी. तब तत्कालीन कन्वीनर अर्जुन सिंह ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया. उन्होंने कहा ‘तुम्हे तो तुम्हारी खुद की बीवी वोट नहीं देगी’, तो कोई और तुझे क्या वोट देगा .’ बस अर्जुन सिंह की यह बात हसनुराम के दिल मे चुभ गई. तभी से उन्होंने ठान लिया कि कुछ भी हो जाए देश का कोई भी ऐसा चुनाव नहीं होगा, जिसे वह लड़ेंगे नहीं. चाहे हार हो या जीत. हसनुराम अंबेडकरी ने राष्ट्रपति पद के लिए भी पर्चा दाखिल किया था. लेकिन, वो कागजी कमी के चलते खारिज हो गया था. बता दें कि पेशे से मनरेगा मजदूर हसनुराम जो पैसे कमाते हैं, उसमें से आधी रकम वो चुनाव लड़ने के लिए जमा कर देते हैं.

जीतने की नहीं है हसरत
लोकल-18 से बात करते हुए हसनूराम ने कहा कि वह चुनाव सिर्फ और सिर्फ हारने के लिए लड़ते हैं. उनकी हसरत चुनाव जीतने की नहीं है. साथ ही उन्होंने चुनाव में हो रहे अंधाधुंध खर्च पर भी चिंता जाहिर की है. अपना फेवरेट नेता उन्होंने डॉक्टर साहब भीमराव अंबेडकर को बताया है.

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Tags: 2024 Loksabha Election, Agra information, Local18

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