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कभी थी बेरोजगारी की मार, आज खुद के साथ इतनी महिलाओं को रोजगार दे रहीं रिंकी

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आदित्य कृष्ण/अमेठी : ख्वाहिशों से नहीं गिरते फूल झोली में अपने कर्म की सांख को हिलाना पड़ता है. अंधेरे को कोसने से कुछ नहीं होता अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना पड़ता है. ग्रामीण अंचल में रोजगार के अवसर कम होते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं रोजगार के लिए दर-दर भटकती हैं. लेकिन अमेठी की एक महिला हैं रिंकी सिंह जिन्होंने आज खुद के रोजगार की शुरुआत कर अपने जीवन में न सिर्फ बदलाव लाया है बल्कि उन्होंने अन्य बेरोजगार महिलाओं और युवतियों को रोजगार देकर उनके चेहरे पर मुस्कान बिखेरने का काम किया है.

रिंकी सिंह अमेठी जिले के गौरीगंज के अन्नीबैजल गांव की रहने वाली है. हिंदी विषय से परास्नातक तक की पढाई करने वाली रिंकी सिंह कई वर्षों तक रोजगार के लिए परेशान रही. बार-बार आने वाली प्रतियोगी परीक्षा में उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई लेकिन जब उन्हें रोजगार नहीं मिला तो उन्होंने अपने खुद के रोजगार की शुरुआत की.

रिंकी सिंह ने एक संस्था से ऋण लेकर अपने खुद के रोजगार की शुरुआत की. वो कपड़े तैयार करवाती हैं और इनका कारखाना है. प्रतिदिन एक कपड़े से 100 रूपये से 300 का फायदा इन्हें होता है. दिन भर में यह करीब 100 सेट कपड़े तैयार करवाती हैं. उनके बने कपड़े दूर-दूर तक जाते हैं.

पहले नहीं था काम आज हो रहा मुनाफा
रिंकी सिंह बताती हैं कि पहले उनके जीवन में मुसीबत का अंबार था लेकिन आज समूह में जोड़ने के बाद उनकी किस्मत बदल गई. उन्होंने अन्य महिलाओं को भी अपने साथ काम में रखा है और आज वह भी अच्छा खासा मुनाफा कमा रही है. जिन महिलाओं को उन्होंने काम दिया है उन्हें भी वह काम के हिसाब से प्रतिदिन पैसे देती हैं.

रिंकी सिंह बताती है कि पहले अपनी जरूरत पूरी करने के लिए दूसरों के सहारे रहना पड़ता था लेकिन आज वह खुद रोजगार से जुड़ी हैं और उन्हें बहुत खुशी है कि वह अपनी ज़रूरतें और अपने परिवार का ख्याल खुद रख ले रही हैं.

Tags: Amethi information, Local18, UP information

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