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गोबर, गौमूत्र, और छाछ समेत 8 घरेलू चीजों से तैयार करें ये कमाल का कीटनाशक! होगा बंपर उत्पादन

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सिमरनजीत सिंह/शाहजहांपुर : सनातन धर्म में पूजनीय मानी जाने वाली गाय को हम माता का दर्जा देते हैं, मान्यता है कि जिस घर में गाय की सेवा की जाती है, उस घर से सारे दोष दूर हो जाते हैं. धार्मिक महत्व के अलावा भारतीय गाय आर्थिक और पर्यावरण की दृष्टि से भी लाभप्रद है. गाय से केवल डेयरी उत्पाद ही नहीं बल्कि जैविक खाद और जैविक कीटनाशक भी तैयार किए जाते हैं. गाय के गोबर और मूत्र से तैयार किए गए जैविक उत्पादों का खेत में इस्तेमाल करने से रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं होती. इसके अलावा पर्यावरण के साथ-साथ मृदा की सेहत भी सुधार होता है.

कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के वैज्ञानिक डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि एक देसी गाय से किसान 30 एकड़ खेत में जैविक खेती कर सकता है. देसी गाय के गोबर और मूत्र के साथ कुछ अन्य चीजों को मिलाकर कुणपजल तैयार किया जाता है. जिसका इस्तेमाल करने से फसल को कीटों से बचाया जा सकता है. पौधों की वृद्धि अच्छी होगी और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलेगा.

इन चीजों की होगी आवश्यकता
डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि कुणपजल बनाने के लिए 10 से 15 किलोग्राम देसी गाय का गोबर और इतनी ही मात्रा में मूत्र, 21 किलोग्राम गुड़, 2 किलो अंकुरित साबुत उड़द की दाल, 2 किलोग्राम सरसों या फिर नीम की खली, करीब 20 किलो बारीक कटे हुए खरपतवार, 1 लीटर छाछ और करीब 5 किलो धान की भूसी और 10 से 12 लीटर पानी की आवश्यकता होगी.

कुणपजल तैयार करने की विधि
डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि कुणपजल तैयार करने के लिए 200 लीटर क्षमता वाले ढक्कन युक्त प्लास्टिक के ड्रम में सबसे पहले गाय का गोबर और मूत्र को डालकर अच्छे से मिला लें. उसके बाद सरसों या फिर नीम की खली, अंकुरित उड़द और गुड़ डालकर मिला लें. उसके बाद 10 से 12 लीटर पानी डाल कर अच्छी से मिला दें. फिर बारीक कटे हुए खरपतवार और नीम की पत्तियां डाल दें. उसके बाद धान की भूसी को एक बर्तन में पानी डाल कर 15 से 20 मिनट तक उबालें. दो दिन रखने के बाद इसको छान लें और निकले तरल को मिश्रण में मिला दें. इसके बाद 5 से 7 दिन पुराना छाछ और ड्रम में नीम की खली को डालकर अच्छे से मिला दें. फिर पानी की मात्रा को 150 लीटर कर दें. इस घोल को रोजाना सुबह और शाम 5 मिनट लकड़ी के डंडे के सहारे मिलाते रहे और ड्रम के ढक्कन को फिर टाइट कर बंद कर दें. यह घोल गर्मियों के मौसम में 10 से 12 दिन और सर्दियों में 20 से 25 दिन में बनकर तैयार हो जाएगा. जब ड्रम में बुलबुले उठने बंद हो जाए तो समझिए कुणपजल तैयार हो चुका है.

ऐसे करें कुणपजल का इस्तेमाल
डॉ. एनपी गुप्ता ने बताया कि कुणपजल तैयार होने के बाद उसको सूती कपड़े से अच्छी तरह छान लें. जिससे स्प्रे करने के दौरान नोजल में कोई अवरोध पैदा ना हो. तैयार हुए कुणपजल को खेत में पलेवा करने के दौरान या खेत में सिंचाई करने के दौरान दे सकते हैं. या फिर 100 लीटर पानी में 10 लीटर कुणपजल मिलाकर फसलों पर छिड़काव भी कर सकते हैं. जिससे फसल में कीट नहीं लगेंगे और किसानों को बेहतर उत्पादन मिलेगा.

Tags: Agriculture, Local18, Shahjahanpur News, Uttar Pradesh News Hindi

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