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तो ऐसा ढाया गया था विवादित ढ़ांचा, पूरी कहानी कारसेवक रितेश गुप्ता की जुबानी

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सनन्दन उपाध्याय/बलिया: इस समय पूरा देश राममय हो गया है. जिस घड़ी का इंतजार राम भक्त सैकड़ों साल से कर रहे थे, वह समय अब आ चुका है. 22 जनवरी को प्रभु का प्राण प्रतिष्ठा है. मंदिर से जुड़े लोगों के अपने-अपने संघर्ष है, जो वह मंदिर बनने के बाद साझा कर रहे हैं. रामभक्तों का इस समय खुशी का ठिकाना नहीं है. आज हम एक ऐसे ही राम भक्त की बात करेंगे जिसने राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. जी हां ई रिक्शा चालक जिसने राम जन्मभूमि के विवादित ढांचे को न धराशाई किया बल्कि रातों-रात एक छोटा सा मंदिर बनाकर श्री राम को विराजमान करने के कार्य में भी सहभागी बना. आइए जानते हैं आखिर क्या रहा इस ई रिक्शा चालक का राम जन्मभूमि से नाता

कारसेवक ई रिक्शा चालक रितेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि हम लोग 6 दिसंबर को अयोध्या पहुंचकर ढांचे को धराशायी करने के बाद रातों-रात एक छोटा सा मंदिर बनाकर भगवान श्री राम को विराजित किए. उसके बाद बलिया आते ही जय श्री राम नारे के साथ गिरफ्तारी हो गई. कोतवाली में ले जाकर रात में पिटाई करने के बाद हम लोगों को 15 दिनों के लिए जेल भेज दिया गया.

ढ़ाचा गिरने के रात की कहानी

ई रिक्शा चालक रितेश कुमार गुप्ता उर्फ टिंकू ने बताया कि मैं बचपन से अपने बुआ के घर लोहा पट्टी बलिया में रहता हूं. अभी वर्तमान में यहां ई रिक्शा चलाने का काम करता हूं. मेरा घर छपरा दौलतगंज है. हम लोग बलिया से सन 5 दिसंबर 1992 को अयोध्या के लिए रवाना हुए थे 6 दिसंबर को वहां पहुंच गए. अयोध्या में तेजा पंडा के पास हम लोग रुके थे. वहां भाषण सुनने के बाद विवादित ढांचे को हम लोग धराशायी  किए और वहां से सभी ईट और पत्थर लेकर पुनः तेजा पंडा के पास आ गए और वहां पर आराम करने के बाद रात को पंडा जी के कहने पर दोबारा हम लोग वहां गए तो नीव का काम किए और रातों-रात एक छोटा सा मंदिर बनाकर उसमें भगवान श्री राम को विराजमान कराया गया.

बलिया आने के बाद हुई गिरफ्तारी

7 दिसंबर को वहां का सब काम पूरा करके बलिया के लिए हम लोग चल दिए. जब हम लोग बलिया पहुंचे तो ओक्डे़नगंज पुलिस चौकी के पास जय श्री राम के नारे के साथ हम सभी को गिरफ्तार कर लिया गया. रात में हम लोगों को कोतवाली भेजा गया. आदेश कक्षा से बुलाकर हम लोगों कि लाठी और डंडे से रात में पिटाई हुई उसके बाद लगभग 15 दिनों के लिए हम लोगों को जेल भेज दिया गया. आज रामलला के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बहुत खुशी है. आज फिर उस समय का जोश, उत्साह और रामलला के प्रति प्रेम कि बहार आ गई है. वर्षों का सपना जो हम लोगों का साकार हो गया. हमारे प्रभु श्री राम आ गए.

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