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लंबी आंखमिचौली के बाद पिंजड़े में फंसी ‘कॉलरवाली’ बाघिन, कहीं हो न जाए उम्रकैद

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सृजित अवस्थी/ पीलीभीत: बीते कई दिनों से शहर के नजदीक एक बाघिन की मौजूदगी देखी जा रही थी. बीते 5 दिनों से इस बाघिन ने शहर से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित इस्लामनगर गांव में डेरा जमाया हुआ था. जहां इसे रेस्क्यू करने के लिहाज से पिंजड़ा लगाया गया था. रविवार को तकरीबन दोपहर एक बजे बाघिन पिंजड़े में कैद हो गई. हाल फिलहाल बाघिन को डीएफओ आवास पर रखा गया है.

बता दें कि 26 दिसम्बर को पीलीभीत के अटकोना गांव में घंटो तक दीवार पर बैठी बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू कर लिया गया था. तमाम मेडिकल परीक्षण व निगरानी के लिए रेडियो कॉलर लगाकर बाघिन को 31 दिसम्बर को एक बार फिर से पीलीभीत टाइगर रिजर्व में रिलीज कर दिया गया था. लेकिन  कॉलर वाली बाघिन ने कुछ दिन जंगल में रहने के बाद एकबार फिर से आबादी की ओर रुख कर लिया. चहलकदमी करते हुए यह 11 जनवरी को शहर के आसाम चौराहे तक आ पहुंची. शहर के बीचों बीच बाघिन की मौजूदगी से वन महकमे में हड़कंप मच गया.

पिंजड़े में कैद हो गई बाघिन
11 जनवरी से 16 जनवरी तक शहर के आसपास के गांवों में विचरण करने के बाद बाघिन ने शहर से सटे इस्लामनगर गांव की सडा डबरी में डेरा जमा लिया. जिसके बाद इसे कैद करने की कवायद शुरू की गई. पिंजड़ा लगाने के साथ ही साथ एक बकरा पिंजड़े के अंदर व एक बकरा बाहर बांधा गया. 17 जनवरी को बाघिन ने बाहर बंधे बकरे को शिकार बना लिया. तब से लगातार यह पिंजड़े के आसपास मौजूद थी. आज शिकार की तलाश में यह पिंजड़े में कैद हो गई. हाल फिलहाल बाघिन को पीलीभीत टाइगर रिजर्व मुख्यालय स्थित डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल के आवास पर रखा गया है. जहां PTR के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार कॉलरवाली बाघिन के स्वास्थ्य परीक्षण कर रहे है.

कॉलरवाली पर मंडराया उम्रकैद का खतरा
आमतौर पर जंगल से निकले बाघ शिकार की तलाश में आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते है. वहीं दुर्घटनावश कई बार इंसान भी इन वन्यजीवों का शिकार बन जाते है. जिसके बाद इन पर आदमखोर होने का तमगा लग जाता है. वहीं ऐसी परिस्थितियों में बाघों को रेस्क्यू के बाद चिड़ियाघर भेज दिया जाता है. लेकिन 8 अक्टूबर से आबादी में विचरण कर रही बाघिन ने किसी भी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया है. ऐसे में यह देखना अहम होगा कि वनाधिकारी इस मामले में क्या रुख़ अपनाएंगे.

री-वाइल्डिंग सेंटर में रखने से बाघिन को मिल सकती है आज़ाद ज़िन्दगी
पूरे मामले पर अधिक जानकारी देते हुए वरिष्ठ वनजीवन पत्रकार केशव अग्रवाल का कहना है कि लंबे समय से आबादी में रहने के चलते इस बाघिन के व्यवहार में बदलाव हुए होंगे. ऐसे में आवश्यक है कि वन विभाग को इस बाघिन के स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इस बाघिन को री-वाइल्डिंग सेंटर में रखा जाना चाहिए. ऐसा करने से बाघिन को एक बार फिर से जंगल में आजाद ज़िन्दगी मिल सकेगी.

पूरे मामले पर अधिक जानकारी देते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघिन को पिंजड़े की सहायता से रेस्क्यू कर लिया गया है. हाल फिलहाल इसे मेडिकल आब्जर्वेशन में रखा जाएगा. जिसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

Tags: Local18, Pilibhit information

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