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शबरी की तरह की तपस्या, छोड़ा घर-परिवार, हजारीलाल 31 साल बाद अब जाएंगे घर

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रिपोर्ट – सर्वेश श्रीवास्तव

अयोध्या. त्रेता युग में शबरी की आस्था प्रभु श्रीराम को उनकी कुटिया तक ले आई थी. लेकिन कलयुग में हजारीलाल की आस्था भी कम नहीं है. अयोध्या का राम मंदिर न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि यहां विराजमान होने वाले रामलला को साक्षी मानकर कई लोगों ने संकल्प भी लिया था. कुछ ऐसा ही संकल्प 31 वर्ष पहले हजारीलाल बाबा ने भी लिया था कि जब तक प्रभु राम अपने भव्य महल में विराजमान नहीं हो जाते, तब तक हम अयोध्या में ही रहकर उनकी सेवा करेंगे. जिस दिन प्रभु राम अपने भव्य महल में विराजमान हो जाएंगे उस दिन हम अपने घर जाएंगे.

हम बात कर रहे हैं शाहजहांपुर के रहने वाले हजारी बाबा की. 1992 में जब अयोध्या में कार सेवा हो रही थी तो उस दौरान अपने पांच मित्रों के साथ हजारीलाल बाबा भी पहुंचे थे. 6 दिसंबर 1992 को जब बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहा दिया गया, तो उसके साक्षी हजारीलाल भी थे. ढांचा ढहाए जाने के दौरान हजारीलाल का पैर मलबे में फंस गया था. सिर पर गंभीर चोटें भी आई थीं. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था.

31 वर्ष पहले घर और परिवार का त्याग किया
हजारीलाल बाबा बताते हैं कि उन्होंने लगभग दो हफ्ते जेल में रखा गया था. ठीक होने के बाद फिर अयोध्या आए और तब से अभी तक यहीं हैं. वे राम भक्तों को राम मंदिर मॉडल का दर्शन कराते रहे हैं. इतना ही नहीं उन्हें हजारीलाल बाबा का नाम राम भक्त ने ही दिया है. 31 वर्ष के इस लंबे संघर्ष पर अब विराम लगने जा रहा है. हजारीलाल बाबा का सपना पूरा हो रहा है, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है. अब वह अपने घर जाएंगे परिवार वालों से भी मुलाकात करेंगे.

पत्नी की मौत के बाद भी नहीं गए
हजारीलाल बाबा बताते हैं कि उनके अयोध्या में रहने के दौरान ही पत्नी का देहांत हो गया, लेकिन वे घर नहीं गए. बेटे से बात होती थी तो सबको यही कहते थे कि अब तभी घर आएंगे जब प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी. भव्य महल में प्रभु राम विराजमान हो जाएंगे.

Tags: Ayodhya Karsevak, Local18, Ram Mandir

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