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दुनिया की ‘दूसरी हनुमानगढ़ी’… अयोध्या जैसा यहां भी हनुमान मंदिर, कभी नहीं बंद होते पट

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अर्पित बड़कुल/दमोह: अयोध्या की हनुमानगढ़ी से आप सभी परिचित होंगे. मान्यता है कि हनुमानजी आज भी वहां वास करते हैं. ऐसी मान्यता है कि जब श्रीराम दशानन का वध करके अयोध्या लौटे थे, तब हनुमानजी को रहने के लिए यह गढ़ी दी गई थी. लेकिन, धरती पर एक दूसरी हनुमानगढ़ी भी है, जो दमोह में है. यह मंदिर घंटाघर के नजदीक ‘हनुमंत लाल जी की गढ़ी’ के नाम से प्रसिद्ध है. इसे मंदिर को भक्त दूसरी हनुमानगढ़ी के नाम से भी जानते हैं.

यहां स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है. इसकी स्थापना का रहस्य आज भी अज्ञात है. दूसरी हनुमानगढ़ी की एक और खासियत है. इस मंदिर के पट कभी बंद नहीं होते. 24 घंटे खुले रहते हैं. हनुमानजी के श्रृंगार, चंद्र या सूर्य ग्रहण या किसी विशेष परिस्थितियों में प्रतिमा के आगे पर्दा डाला जाता है. इस मंदिर का प्रताप है कि सूरज की पहली किरण से लेकर चंद्रमा के ढलने के बाद भी यहां कपाट बंद नहीं होते.

इसलिए है हनुमानगढ़ी नाम
पुजारी गोविंद प्रसाद दुबे ने बताया कि इस गढ़ी को दूसरी हनुमानगढ़ी इसलिए बोला जाता है, क्योंकि रामनगरी अयोध्या में जो हनुमानगढ़ी का मुख्य द्वार है, उसी की तरह इस हनुमानगढ़ी का द्वार भी है. वैसे ही कलाकृति यहां भी देखने को मिलती है, जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यहां भी हनुमंत लला कभी रहे होंगे. जिस जगह हनुमानजी महाराज विराजमान हैं, वहां करीब 200 साल पुराना बरगद का वृक्ष था. इस मंदिर की स्थापना किसने की, इस बात का पता नहीं चल सका.

स्वरूप बदलती है मूर्ति!
आगे बताया कि प्रतिमा को जैसे-जैसे गौर से देंखेगे आपको हर बार कुछ अलग स्वरूप दिखाई पड़ेगा. जैसे वृंदावन मे शाह जी का मंदिर है, जिसको श्रद्धालु भक्त टेढ़े खंभे के नाम से जानते हैं उसके समकालीन ही यह प्रतिमा मानी जाती है. इस मंदिर में प्राचीन बहर भी है, जो करीब 2 फीट चौड़ी और 40 फीट लंबी है. मन्दिर परिसर में पर्याप्त जगह न होने के कारण इसे बंद कर दिया गया है. भक्त नारायण प्रसाद रैकवार ने बताया कि यह जिले का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां देर रात तक पट खुले रहते हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. NEWS18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.

Tags: Damoh News, Hanuman Temple, Hanumangarhi, Local18

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