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मथुरा नहीं,यूपी के इस शहर के पेड़े के लोग हैंदीवाने,शुद्ध खोया से होताहै तैयार

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अंजली शर्मा/कन्नौज. वैसे तो कन्नौज जिला किसी भी पहचान का मोहताज नहीं लेकिन कन्नौज में कुछ ऐसी चीज हैं जो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं. इत्र की खुशबू के साथ-साथ यहां पर खाने-पीने में भी आपको शुद्धता मिलेगी. ऐसे में कन्नौज के लोग मीठे को कुछ ज्यादा ही पसंद करते हैं और यहां के मीठे का स्वाद भी कुछ अलग ही होता है. ऐसे में कनौजिया पेड़ा लोगों को हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करता है. कोई भी त्यौहार हो कोई भी खुशी का मौका लोग कनौजिया पेड़ा ले जाना कभी नहीं भूलते.

कन्नौज के मुख्यालय स्थित कन्नौज रेलवे स्टेशन मार्ग पर कटियार मिष्ठान भंडार नाम से यह दुकान बीते करीब 55 सालों से ज्यादा समय से यहां पर है. पहले तो यह छोटी सी दुकान हुआ करती थी. लेकिन समय के साथ परिवर्तन हुआ और आज यह बड़े से जगह में पूरा मिष्ठान भंडार बना हुआ है. एक से बढ़कर एक मिठाइयां शुद्ध खोए और दूध से बनी हुई यहां पर लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं.

शुद्धता का रखते हैं विशेष ध्यान
मिष्ठान भंडार कर्मी गौरव ने कहा कि यह कटियार मिष्ठान भंडार है. यहां पर लोग बहुत दूर-दूर से मिठाईयां लेने आते हैं. हमारे यहां कई तरीके की मिठाइयां बहुत प्रसिद्ध है. इसमें कनौजिया पेड़ा बहुत प्रसिद्ध है. इन पेड़े में इलायची, काजू, किशमिश जैसे और भी मेवे डाले जाते हैं. जिनसे इनके स्वाद में और भी ज्यादा चार चांद लग जाते हैं. इनके दाम भी कुछ ज्यादा नहीं है 450 रूपए किलो यह पेड़े मिलते हैं जो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते है. हम समय के हिसाब से मिठाईयां को बनाते हैं और इसमें शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं.

स्वाद है बेमिसाल
दुकान मालिक सौरभ कटियार ने बताया कि यह दुकान हमारे दादा के जमाने की है और यहां पर महज कुछ ही मिठाइयों का काम होता था. जिसके बाद समय बदला हम लोगों ने भी मेहनत की और आज हमारे यहां करीब एक दर्जन से ज्यादा अलग-अलग तरह की स्वादिष्ट मिठाइयां हैं. यहां पर हमारे यहां स्वादिष्ट पेड़ा जो सबसे ज्यादा बिकने वाला है यहां पर हर आम और खास इस पेड़े का स्वाद एक बार जरूर लेते हैं. हमारे यहां मिठाइयों के कोई ज्यादा रेट भी नहीं है 150 रुपए के आसपास से शुरू होकर कर 400 से 450 रुपए तक की मिठाइयां किलो के हिसाब से मिल जाती है. लोग यहां से बहुत दूर-दूर से मिठाईयां लेने आते हैं और अपने मिलने वालों तक दूर-दूर तक पहुचाते भी हैं.

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FIRST PUBLISHED : September 19, 2023, 19:29 IST

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