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गन्ने की खेती से इस किसान बदली अपनी किस्मत, किसानों के लिए पेश की मिसाल

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सौरभ वर्मा/रायबरेलीः आपने कई प्रकृति प्रेमियों को देखा होगा, जो लोगों को प्रकृति के संरक्षण के साथ ही प्रकृति से होने वाले फायदे के बारे में जागरूक करते हैं. सरकार भी प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, और इसी दिशा में उत्तर प्रदेश के रायबरेली जनपद में एक किसान है जो इस दौर में भी प्राकृतिक चीजों को संरक्षित करने के साथ ही प्राकृतिक तरीके से खेती भी कर रहा है. रायबरेली के शिवगढ़ क्षेत्र के कसना गांव के किसान शेषपाल सिंह के जैसे किसान हमें प्रेरित करते हैं कि हमें प्राकृतिक खेती के महत्व को समझना और अपनाना चाहिए.

किसान शेषपाल सिंह के मुताबिक, उन्होंने पिछले कई वर्षों से अपनी खेती में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया है, बल्कि वे प्राकृतिक तरीकों से खेती कर रहे हैं. उनके खेतों में गोमूत्र और गोबर का प्रयोग होता है, और वे लोगों को प्राकृतिक खेती के महत्व के बारे में जागरूक करते हैं. उनके अनुसार, रासायनिक उर्वरकों का अधिक प्रयोग करने से कई जटिल बीमारियाँ और समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, और यह भी खान-पान के सही नहीं होने की वजह से हो सकता है.

15 वर्षों से लगभग 2 एकड़ में गन्ने कर रहा है खेती
किसान शेषपाल सिंह ने कहा कि वे लगभग 15 वर्षों से लगभग 2 एकड़ में गन्ने और 1 एकड़ में हल्दी, नींबू, अमरूद, करौंदा जैसे फल और पौधों की उद्यानिक खेती कर रहे हैं. वे रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं करते हैं और इसके बजाय प्राकृतिक तरीकों से खेती करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. इस तरीके से, वे सालाना लाखों रुपये की कमाई करते हैं. उन्होंने बताया कि वे गन्ने को चीनी मिल में नहीं बेचते, बल्कि स्वयं ही गुड़ और राब तैयार करके बाजार में बेचते हैं, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता है.शेषपाल सिंह ने आगे कहा कि आजकल कई लोग खान-पान के तरीकों में जटिलताएँ जूझ रहे हैं जो प्रकृतिक खेती की तरफ देखने की आवश्यकता बना देती है. उनके अनुसार, हमें खेतों में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग की बजाय प्राकृतिक तरीकों से खेती करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि हम समस्याओं से बच सकें.

Tags: Local18, Rae Bareli News, Uttar pradesh information

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