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शहर की इन ऐतिहासिक धरोहरों की संवरेगी तस्वीर, ध्वस्त होने का था खतरा

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सृजित अवस्थी/पीलीभीत.उत्तरप्रदेश के पीलीभीत जिले का ब्रिटिश काल के साथ ही साथ रूहेलाशासन काल के दौरान काफी अधिक महत्व रहा है. लेकिन इस ऐतिहासिक महत्व की गवाही देने वाली ज़िले की लगभग सभी धरोहर बदहाली का दंश झेल रही है. अगर शहर की बात की जाए तो शहर में रूहेला शासनकाल में बनी प्रमुख इमारतों में बरेली दरवाजा, कोतवाली दरवाजा, जामा मस्जिद, गौरीशंकर मन्दिर के द्वार, हमाम आदि शामिल हैं.

इनमें से जामा मस्जिद व गौरीशंकर मंदिर द्वार को छोड़कर तकरीबन सभी इमारतें देखभाल व जागरूकता के अभाव में जर्जर होती जा रही हैं. कई इमारतें तो ऐसी स्थिति में आ चुकी हैं कि किसी भी वक़्त वहां बसा हादसा हो सकता है. इन सब धरोहरों को संरक्षित करने के लिए शहर के सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप लंबे समय से संबंधित विभागों से पत्राचार व संपर्क कर रहे थे. हाल ही में पत्र का जवाब देते हुए राज्य पुरातत्व विभाग ने शिवम कश्यप को एक पत्र भेजा है. इस पत्र में बरेली दरवाजा व कोतवाली दरवाजे को संरक्षित करने की कवायद शुरू करने की बात कही गई है.

बरेली दरवाजे का इतिहास
बरेली दरवाजे पर लगे शिलालेख के अनुसार इस दरवाजे का निर्माण सूबेदार अली मोहम्मद खां ने सन 1734 में किया था. यह दरवाजा शहर के जेपी रोड पर स्थित है. सूबेदार ने इसके अलावा अन्य कई दरवाजों का निर्माण भी किया था, लेकिन रखरखाव के अभाव में सभी दरवाजे अब काल के गाल में समा रहे हैं.

Tags: Local18, Pilibhit information, Uttar Pradesh News Hindi

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