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UPSC की आपत्ति के चक्कर में फंसी UP के DGP की कुर्सी, IPS डीएस चौहान अब नहीं बन पायेंगे स्थाई DGP

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रिपोर्ट- राजीव प्रताप सिंह

लखनऊ. बीते दिनों उत्तर प्रदेश में स्थाई DGP की नियुक्ति के लिए योगी सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की आपत्ति के बाद स्थाई DGP को लेकर पेंच फंस गया है. UPSC ने राज्य सरकार द्वारा डीजीपी के चयन के लिए भेजे गए पैनल को वापस करने के साथ ही पूर्व DGP मुकुल गोयल को हटाने की वजह पूछी थी. जिसके बाद UPSC की आपत्ति पर सरकार ने ना सिर्फ IPS मुकुल गोयल पर लगे आरोपों की फेहरिस्त UPSC को भेज दी, बल्कि मुकुल गोयल को शासकीय कार्यों की अवहेलना करने, विभाग से जुड़े कामों में रुचि ना दिखाने और अकर्मण्यता के चलते हटाये जाने की जानकारी भी दी है. लेकिन इसके बावजूद बीते 30 सितंबर 2022 तक UPSC द्वारा DGP के नामों का पैनल वापस नहीं भेजा जा सका है. जिसके चलते UP के कार्यवाहाक DGP IPS डीएस चौहान के रिटायरमेंट में अब महज 6 माह से कम का समय बचने के कारण IPS डीएस चौहान अब UP के स्थाई DGP नहीं बन पायेंगे.

दरअसल, बीते 11 मई को IPS मुकुल गोयल को DGP के पद से हटाये जाने के बाद योगी सरकार ने 13 मई को IPS डीएस चौहान को UP का कार्यवाहक DGP नियुक्त किया था. और फिर सितंबर के पहले सप्ताह में सरकार ने नए DGP की नियुक्ति के लिए 30 साल की सेवा पूरी कर लेने वाले 1992 बैच तक के 42 IPS अधिकारियों की सूची भेजी थी. जिसमें कार्यवाहक DGP डीएस चौहान के साथ-साथ प्रदेश के सबसे वरिष्ठ IPS मुकुल गोयल का भी नाम शामिल था. लेकिन इस दौरान UPSC ने राज्य सरकार द्वारा डीजीपी के चयन के लिए भेजे गए पैनल को वापस कर पूर्व DGP मुकुल गोयल को हटाने की वजह पूछ ली थी. जिसके बाद सरकार ने UPSC की आपत्तियों का तो जवाब भेज दिया, लेकिन UPSC ने कल बीते 30 सितंबर तक स्थाई DGP के लिये IPS अधिकारियो के नामों का पैनल वापस नहीं भेजा. जिसके चलते अब UP के मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी डीएस चौहान के रिटायरमेंट में महज 6 माह से कम का समय बचने के चलते IPS डीएस चौहान UP के स्थाई डीजीपी नहीं बन सकेंगे.

हालांकि ये पहला मौका है जब UPSC द्वारा UP के स्थाई DGP की नियुक्ति के मामले में इस तरह की आपत्ति जताई गई है. जिससे एक ओर जहां UP के कार्यवाहक DGP डीएस चौहान को झटका लगा है, तो वहीं कुछ दिनो पहले UP के अपर मुख्य सचिव IAS अवनीश अवस्थी को भी सेवा विस्तार ना दिये जाने से एक बड़ा झटका लगा था. हांलाकि एक ओर जहां योगी सरकार द्वारा अब स्थाई DPG के बजाय IPS डीएस चौहान को ही उनके रिटायरमेंट मार्च 2023 तक कार्यवाहक डीजीपी बनाए रखने के कयास लगाये जा रहे हैं. क्योंकि बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की सरकारों ने पहले भी UPSC के पैनल और इस संबंध में सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइन को दरकिनार कर कई माह तक कार्यवाहक DGP की तैनाती कर चुकी है. जबकि दूसरी ओर UP में जल्द ही स्थाई DGP की नियुक्ति के भी प्रयास किये जा सकते हैं.

2006 में प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में DGP की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश देते हुए कहा था कि “एक्टिंग DGP की कोई पोस्ट नहीं होती है. DGP का कार्यकाल खत्म होने से पहले राज्य सरकार इस पद के लिए नाम UPSC को भेजेगी. इस लिस्ट को वहां से UPSC जोड़-घटाकर वापस लौटाएगा. इस लिस्ट में से राज्य सरकार किसी भी नाम का चयन कर सकती है. DGP का कार्यकाल कम से कम 2 साल जरूरी है. “हालांकि वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इसमें संशोधन करते हुए 2 वर्ष के कार्यकाल की जगह सिर्फ 6 माह का कार्यकाल शेष बचना जरूरी कर दिया था. ऐसे में अगर सुप्रीम कोर्ट की इस गाइडलाइन के आधार पर UP में स्थाई DGP की नियुक्ति होगी, तो UP के मौजूदा डीजीपी जेल IPS आनंद कुमार वरिष्ठता और शेष कार्यकाल के आधार पर DGP पद के प्रबल दावेदार होंगे. ऐसी स्थित में सरकार IPS आनंद कुमार को UP का नया DGP बना सकती है.

Tags: UP DGP, UP information, UPSC, Yogi authorities

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