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Lucknow Bhool Bhulaiya: भूल भुलैया से बाहर निकल पाना है मुश्किल! जहां दीवारों के भी होते हैं ‘कान’

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रिपोर्ट- अंजलि सिंह राजपूत

लखनऊ. नवाबों के शहर लखनऊ में स्थित 200 साल पुरानी विश्वप्रसिद्ध भूल भुलैया हमेशा पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है. इस भूल भुलैया में चारों ओर चार रास्ते हैं, जिसमें तीन गलत और एक सही है. जबकि इसकी 15 फीट मोटी दीवारें और ढाई फीट चौड़ा का रास्ता है. जब पर्यटक इसमें जाते हैं तो उनको ऐसा महसूस होता है कि वो दीवारों के अंदर चल रहे हैं. खास बात यह है कि संकरी दीवारें होने के बावजूद पर्यटकों को इसमें घुटन का एहसास बिल्कुल भी नहीं होता है.

वहीं, भूल भुलैया की शुरुआत ही 45 सीढ़ियों से होती है. जबकि इन्हीं सीढ़ियों पर यह भूलभुलैया आकर खत्म भी होती है. चौक इलाके में बड़े इमामबाड़े के अंदर यह भूल भुलैया बनी हुई है.

330 फीट लंबी है सुरंग
भूल भुलैया की पहली गैलरी की शुरुआत 330 फीट लंबी सुरंग से होती है, जहां पर ऐसी खिड़कियां बनी हुई हैं जिनको दुश्मनों को देखने का ठिकाना नाम दिया गया है. इसके बारे में कहा जाता है कि नवाबों के सिपाही इन्हीं खिड़कियों से इमामबाड़ा और भूल भुलैया के मेन गेट को देख सकते थे, लेकिन जब आप इन खिड़कियों को नीचे से देखेंगे तो ऊपर की ओर आपको कुछ भी नजर नहीं आएगा. आपको नीचे से इन खिड़कियों की ओर देखने पर अंधेरा नजर आएगा.

उड़द की दाल और गुड़ से बनी है दीवारें
यह भूल भुलैया 200 साल पुरानी है. ऐसा बताया जाता है कि इसकी सभी दीवारों को उड़द की दाल, गुड़, बेल, गन्ने का रस, सिंघाड़े का आटा और शहद के मिश्रण से बनाया गया है.

यहां दीवारें के भी हैं कान
भूल भुलैया को इस तरह बनाया गया है कि आप 20 फीट की दूरी पर खड़े होकर बिना किसी मोबाइल के अपने साथी से आसानी से बातें कर सकते हैं. इसके बारे में ऐसा बताया जाता है कि सिपाही आपस में दूरी पर खड़े होकर इन्हीं दीवारों के जरिए बात करते थे, जो सीधे दीवारों पर कान लगा कर सिपाही सुन लिया करते थे. हवा के जरिए यहां पर बातें आसानी से इधर से उधर हो जाती हैं और लोग इसे बड़ा रहस्य समझते हैं.

बालकनी बंद होने से पर्यटकों में निराशा
यहां पर आने वाले पर्यटकों को पिछले कुछ वक्त से निराशा ही हाथ लग रही है. इसकी वजह यह है कि यहां की सबसे खूबसूरत बालकनी को जर्जर होने की वजह से पुरातत्व विभाग ने बंद कर दिया है. यह वही गैलरी है जहां पर माचिस की तीली जलाने पर 20 फीट की दूरी पर खड़े व्यक्ति को भी तीली की आवाज आ जाती थी. सबसे दिलचस्प भूल भुलैया की यही बालकनी हुआ करती थी.

बिना गाइड के भटक जाते हैं लोग
भूल भुलैया में कई रास्ते होने के वजह से लोग अक्सर यहां पर बिना गाइड के रास्ता भूल जाते हैं. रोज शाम को सर्च ऑपरेशन चलाकर इनके अंदर भटक रहे लोगों को बाहर निकाला जाता है. इस भूल भुलैया में गाइड का काम करने वाले आमिर पिछले 12 सालों पर्यटकों को भूल भुलैया के रहस्य से रूबरू करा रहे हैं.

लखनऊ पयर्टन का बड़ा हब है भूल भुलैया
यह भूल भुलैया लखनऊ पयर्टन का बड़ा सेंटर है. इसे रोजाना देखने के लिए आने वालों की तादाद हजारों में है. इसके अलावा विदेशों से भी लोग यहां आते हैं और उसकी यादों को अपने कैमरे में कैद करके लेकर जाते हैं. भूल भुलैया खुलने का समय सुबह 6 बजे है, तो इसे शाम 5 बजे बंद किया जाता है. यह लखनऊ शहर के चौक इलाके में बना हुआ है. जबकि इसका टिकट प्रति व्यक्ति 50 रुपये है.

Tags: Lucknow metropolis information, Lucknow information, UP Tourism Department

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