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09 दिवसीय विराट किसान मेला का द्वितीय दिवस

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प्रयागराज माघ मेला के साथ कृषि विभाग द्वारा 09 दिवसीय विराट किसान मेला दिनांक 30.01.2021 से 07.02.2021 तक की अवधि में किया जा रहा है। मेले के द्वितीय दिवस दिनांक 31.01.2021 को मुख्य अतिथि आर के सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक (ब्यूरो) उत्तर प्रदेश लखनऊ रहे। 09 दिवसीय विराट किसान मेला में कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि यंत्रों एवं फार्म मशीनरी सहित लगभग 80 विभागों/संस्थाओं द्वारा लगाये गये स्टालों का आर के सिंह, संयुक्त कुषि निदेशक, (ब्यूरों) उप्र0 लखनऊ द्वारा अवलोकन किया गया। मंच पर मुख्य अतिथियों का प्रयागराज के विभागीय अधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया।
संयुक्त कृषि निदेशक (ब्यूरों) उप्र0 लखनऊ द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि मिट्टी जीव है, और मिट्टी में भरपूर मात्रा में जीवांश कार्बन का होना आवश्यक है। मिट्टी में जीवांश कार्बन के महत्व को बताते हुए बताया गया कि जैसे शरीर में खून न हो तो शरीर के अंग कार्य करना बंद कर देते हैं। उसी तरह यदि मिट्टी में जीवांश कार्बन नहीं होगा तो अनाज पैदा करना सम्भव नहीं होगा। मिटटी में जीवांश कार्बन बढ़ाने हेतु सनई, ढैंचा का प्रयोग करने तथा फसल चक्र अपनाने के बारे में कृषकों को विस्तार से बताया गया। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, गाय का गोबर तथा गोमूत्र की तरफ उन्मुख होकर किसान अपने खेत में जीवांश कार्बन की मात्रा को बढ़ा सकते है।
अरविन्द कुमार सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक विन्ध्याचल मण्डल, विन्ध्याचल द्वारा कृषकों को बताया गया कि यदि कृषक अपने पूरे खेत में जैविक खेती नही करना चाहते हैं तो कम से कम अपने खेत के आधे हिस्से में जैविक खेती अवश्य करें। जिससे जैविक खेती के लाभ के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकें।
ईश्वरी विश्वविद्यालय ब्रह्मा कुमारी के सतीश भाई, वेद प्रकाश मिश्रा एवं प्रमोद कुमार तिवारी द्वारा शाश्वत यौगिक खेती के बारे में कृषकों को जानकारी देते हुए बताया गया कि आज कृषि में रासायनिक खादों के प्रयोग से लागत अधिक लग रही है तथा उत्पादन उसके अनुरूप नहीं हो़ रहा है तथा मानव में इसके दुष्परिणाम भी दिखायी पड़ रहे हैं। इससे बचने के लिए जैविक खेती करना आवश्यक है। जैविक खेती में गाय के गोबर की उपयोगिता को बताते हुए कहा गया कि एक गाय से 10 एकड़ के लिए जैविक खाद तैयार किया जा सकता है। गाय के गोबर में असंख्य लाभदायी सुक्ष्म जीवाणु पाये जाते हैं, जो खेती में लाभदायक है।
,डाॅ0 डीएस चैहान वैज्ञानिक, शुआट्स नैनी, प्रयागराज द्वारा जैविक बीज शोधन की उपयोगिता को बताते हुए कहा गया कि बीज शोधन फसलों में एक तरह का टीकाकरण है। जिस तरह मानव में रोग रोधक क्षमता बढ़ाने एवं रोग शरीर में न आने पाये उसके लिये टीका लगवाया जाता हैं उसी प्रकार बीज शोधन करने से फसल में रोग लगने की सम्भावना न के बराबर हो जाता है। जैविक बीज शोधन में ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम कल्चर एवं एजेटोबैक्टर के प्रयोग के तकनीक पहलुओं के बारे में कृषकों को विस्तार से बताया गया।
ब्रकु डायरेक्टर शाश्वत योगिक खेती कमला दीदी द्वारा किसानों को आज के कार्यक्रम में बताये गये कृषि तकीनीक को अपने खेतो में प्रयोग करने के बारे में विशेष जोर दिया गया।
विराट किसान मेला में पूर्व उप कृषि निदेशक, विजय सिंह, प्रो डाॅ0 जय प्रकाश श्रीवास्तव, कुलभास्कर आश्रम कृषि पीजी काॅलेज, विनोद कुमार, उप कृषि निदेशक, प्रयागराज एवं डाॅ0 अश्वनी कुमार सिंह जिला कृषि अधिकारी, प्रयागराज, डाॅ0 मुकेश पी0एम0 कृषि वैज्ञानिक, शुआट्स, डाॅ0 एमपी सिंह, कृषि वैज्ञानिक के0वी0के0 छाता आदि उपस्थित थे।
विराट किसान मेला में उप कृषि निदेशक प्रयागराज द्वारा कृषि विभाग की योजनाओं के साथ साथ तीन नये कृषि कानूनों के बारे में कृषकों को बताया गया। कृषि विभाग के साथ-साथ अन्य सभी सहयोगी विभागों के मण्डल/जनपद स्तरीय अधिकारी तथा दूर दराज के क्षेत्रों से किसानों द्वारा प्रतिभाग किया गया और प्रदर्शनी में लगाये गये स्टालो पर खरीददारी की गयी।

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