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महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिये ‘‘मिशन शक्ति‘‘ के अभियान -निदेशक महिला कल्याण श्री मनोज कुमार

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रोजगार रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़े जाने वाले किशोर-किशोरियों तथा महिलाओं का चिन्हांकन, जैन्डर चैंपियंस तथा मेधावी छात्राओं की पहचान, पुलिस फैस्लीटेशन आफीसर की नियुक्ति / नामांकन की जनपद, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर की जा रही है गतिविधियां

वन स्टॉप सेन्टर में महिलाओं तथा बालिकाओं के केसों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ के द्वारा किया जाता है

पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ हेतु सब-इंस्पेक्टर या उससे उपर रैंक की महिला अधिकारी को किया जाता है नामित।

हिंसा से प्रभावित महिला को पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने से इन्कार पर ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है।

यदि आई0पी0सी0 की विभिन्न दंडनीय अपराधों में संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा कार्यवाही शुरू करने से इन्कार पर ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ कार्यवाही शुरू करेंगें

पीडि़त महिला अपनी शिकायत दर्ज करने में असमर्थ होने पर ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ घर/वन स्टॉप सेन्टर/अस्पताल से ही उसकी सूचना की रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करेंगे।

ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक या अन्य माध्यम के अंर्तगत महिलाओं के बयान दर्ज करने की सुविधा प्रदान करेंगे।

11 जनवरी 2021 लखनऊ।

निदेशक महिला कल्याण श्री मनोज कुमार राय ने बताया कि प्रदेश में महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के लिये ‘‘मिशन शक्ति‘‘ के अभियान चल रहा है। निदेशक महिला कल्याण ने मिशन शक्ति के लिए निर्धारित की गई कार्ययोजना के अंर्तगत 5 से 15 जनवरी 2021 तक रोजगार रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़े जाने वाले किशोर-किशोरियों तथा महिलाओं का चिन्हांकन, जैन्डर चैंपियंस तथा मेधावी छात्राओं की पहचान, पुलिस फैस्लीटेशन आफीसर की नियुक्ति / नामांकन की जनपद, ब्लॉक एवं ग्राम स्तर पर की जाने वाली गतिविधियां के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

श्री राय ने मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ की भूमिका एवं दायित्व के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेन्टर में महिलाओं तथा बालिकाओं के ही केस आते हैं। इन केसों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने हेतु ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ हेतु सब-इंस्पेक्टर या उससे उपर रैंक की महिला अधिकारी को नामित किया गया है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ सहित 11 जनपदों में पूर्व से ही केसों की संख्या अधिक होने के कारण वन स्टॉप सेन्टरस् में रिपोर्टिग चौकी बनाकर महिला सब इन्सपेक्टर के साथ साथ महिला कान्सटेबल भी नियुक्त किये गये हैं। यदि हिंसा से प्रभावित एक महिला को पुलिस स्टेशन में एफ0आई0आर0/शिकायत या किसी अन्य सहायता को दर्ज करने से इन्कार किया जाता है, तो ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है और विशेष मामलों में पुलिस अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों को इस मुद्दे पर पैरवी भी करता है।

श्री राय ने बताया कि यदि धारा 326ए, 326बी, 354, 354बी, 370, 370ए, 376, 376ए, 376बी, 376सी, 376डी, 376ई या 509 आई0पी0सी0 के अंर्तगत दंडनीय अपराधों में संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा कार्यवाही शुरू करने से इन्कार किया जाता है तो ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ आरोपी पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध धारा 166ए आई0पी0सी0 के अंर्तगत कार्यवाही शुरू करेंगें।
‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ सलाह देंगे कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित मुद्दों के लिए किन कानूनों/धाराओं को लगाया/लागू किया जाए। यह सुनिश्चित करेंगे कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं को और प्रताडि़त न किया जाए। उन्होंने बताया कि यदि पीडि़त महिला अपनी शिकायत/एफ0आई0आर0 दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाने में असमर्थ है, तो ‘‘पुलिस फैसलीटेशन ऑफीसर‘‘ उचित अनुमति प्राप्त करते हुये उसके घर/वन स्टॉप सेन्टर/अस्पताल से ही उसकी सूचना की रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करेंगे। इसके अलावा ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक या अन्य माध्यम से धारा 161 और 164 सी0आर0पी0सी0 के अंर्तगत महिलाओं के बयान दर्ज करने की सुविधा प्रदान करेंगे।

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