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किसान आन्दोलन पर सरकार का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण- रेवती रमण सिंह,राज्यसभा सांसद

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समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह से किसान आन्दोलन और वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम पर विस्तृत चर्चा हुई |  पेश है उसके कुछ अंश …

किसान आंदोलन को एक महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। लोग ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठे है, 30 से ज्यादा किसानों का निधन हो चुका है। फिर भी केंद्र सरकार इसे गम्भीरता से नही ले रही है। इसपर आपकी क्या राय है।

वर्तमान सरकार किसानो के प्रति जैसी असंवेदनशीलता दिखा रही है वो बेहद दुखद है | इतनी मृत्यु होने के बाद भी सरकार सिर्फ बातचीत का नाटक कर रही है जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है | समाजवादी पार्टी सहित पूरा विपक्ष इस काले कानून के खिलाफ है और किसान आन्दोलन का समर्थन करती है |

 

कृषि बिलो के माध्यम से कृषि में कॉरपोरेट को प्रवेश कराया जा रहा है। वो भी तब जब देश की जीडीपी माइनस में है। बेरोजगारी अपने चरम पर है और नोटबन्दी और देशबन्दी के बाद देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। इस बिल की टाइमिंग और सरकार के रवैये को आप कैसे देखते है।

यही तो सबसे बड़ा सवाल है | इस त्रासदी में सरकार बिना सदन में बहस कराये इस बिल को जबरन पास कराती है | सरकार की मंशा पर तो सवाल उठने चाहिए | प्रधानमन्त्री मोदी हर मोर्चे पर विफल हो रहे है | देश का युवा किसान मजदूर सभी परेशान है |

 

कोरोना के आड़ में केंद्र सरकार लगातार देश की संपत्ति को निजी हाथों में बेच रही है। विपक्ष का विरोध भी सिर्फ औपचारिकता ही लगता है। ऐसे में क्या ये मान लिया जाय कि विपक्ष भी केंद्र सरकार के निजीकरण के फैसले के साथ है।

बिल्कुल नही | विपक्ष बटा हुआ है जिसकारण हमारी आवाज दबा दी जा रही है | वर्तमान सरकार ने पूरे देश में अघोषित आपातकाल लगा रखा है | देश की सभी संवैधानिक संस्थाओ को मोदी ने विपक्ष को परेशान करने के लिए लगा रखा है | लेकिन ये तो स्पष्ट है की देश में जिस तरह से निजीकरण हो रहा है उसके दुष्परिणाम जल्द ही सरकार को देखने को मिल जाएगा | देश की करोडो की धरोहर को वर्तमान सर्कार अपने कॉरपोरेट मित्रो को कौड़ियो में बेच रही है |

 हाल ही में सम्पन्न बिहार विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने विपक्ष का बहुत नुकसान किया है। उत्तर प्रदेश में भी वो छोटी छोटी पार्टियों से गठबंधन करके विपक्ष को कमजोर करेंगे। ऐसे में आपकी पार्टी की क्या रणनीति होगी उनसे निपटने की।

ओवेसी भाजपा की बी पार्टी है जो धर्म को आधार बनाकर लोगो की भावनाओं से खिलवाड़ करती है | रही बात हमारी तैयारी की तो हमारी पार्टी कैडर बेस्ड पार्टी है जो लोगो के बीच रहकर काम करती है | यही हमारी ताकत है | समाजवादी पार्टी सर्वसमाज की पार्टी है |हम अपनी जीत के लिए आश्वस्त है |

2022 विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ एक साल ही बाकी है। ऐसे में अब भी शिवपाल यादव को लेकर अब भी सवाल बना है कि उनसे गठबंधन होगा या फिर वो समाजवादी पार्टी का हिस्सा होंगे।

वर्तमान में जो परिस्थिति बन रही है उसको देखकर तो यही लग रहा है की शिवपाल यादव से किसी प्रकार का गठबंधन नही होगा | आगे जो भी होगा वो आपको सूचित कर दिया जाएगा |

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