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दलितों के उत्‍पीड़न में यूपी सबसे आगे

देश में हर 15 मिनट में किया जा रहा एक दलित उत्पीड़न

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नई दिल्‍ली। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले चार सालों में दलित के खिलाफ हिंसा में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 2006 में दलितों के विरूद्ध अपराधों के कुल 27, 070 मामले दर्ज किए गए थे वहीं ये 2011 में बढ़कर 33,719 हो गए। साल 2014 में अनुसूचित जाति के साथ अपराधों के 40,401 मामले, 2015 में 38670 मामले व 2016 में 40,801 मामले दर्ज किए गए। इन आंकड़ों का अगर औसत निकाला जाए तो देश में करीब हर पंद्रह मिनट में एक दलित किसी न किसी प्रकार उत्‍पीड़न का शिकार हो रहा है।

NCRB के आंकड़ों से ये बात भी सामने आई कि बीते चार वर्षों के दौरान देश के जिन राज्यों में दलितों का सर्वाधिक उत्पीड़न के शिकार हुए, उन राज्यों में या तो भाजपा की सरकार है या भाजपा के गठबंधन वाली सरकार रही है। बात करें दलित उत्पीड़न में सबसे आगे रहे राज्यों की तो मध्य प्रदेश दलित उत्पीड़न में सबसे आगे रहा। 2014 में MP में दलित उत्पीड़न के 3,294 मामले दर्ज हुए, जिनकी संख्या 2015 में बढ़कर 3,546 व 2016 में 4,922 तक जा पहुंची। देश में दलितों पर हुए आपराधिक मामलों में से 12.1 फीसदी मामले अकेले मध्‍य प्रदेश में घटे हैं। हालांकि राजस्थान में 2014 में दलित उत्पीड़न के 6,735 मामले, 2015 में 5,911 मामले व 2016 में 5,136 मामले दर्ज हुए। दलित उत्पीड़न के मामले में तीसरे नंबर पर बिहार रहा। जहां बीजेपी व जदयू के साझेदारी की सरकार है। बिहार में 2016 में अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार के 5,701 मामले दर्ज हुए।

दलित युवक को बंधक बनाकर पीटते बदमाश।

सबसे हैरान करने वाला रहा चौथे नंबर पर गुजरात का रहना। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में 2014 में दलित उत्पीड़न के 1,094 मामले, 2015 में 1,010 मामले व 2016 में 1,322 मामले दर्ज किए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में अनुसूचित जाति पर हमलों का राष्ट्रीय औसत जहां 20।4 प्रतिशत था वहीं गुजरात का भाग 32।5 प्रतिशत रहा।

  • दलित उत्पीड़न में उत्‍तर प्रदेश सबसे आगे

उत्तर प्रदेश इस मामले में कुछ ज्यादा ही आगे निकला। दरअसल 2016 में UP दलित उत्पीड़न के मामले में देशभर में सबसे ऊपर निकल गया। साल 2016 में अनुसूचित जाति पर हमलों के मामले में यूपी (10,426) शीर्ष पर रहा। यहां दलित स्त्रियों के साथ बलात्कार के 1065 मामले दर्ज हुए, जिसमें से अकेले लखनऊ में 88 घटनाएं घटी हैं। उसमें भी 43 घटनाएं स्त्रियों से दुष्कर्म की रहीं।

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